Puruṣottama-yoga
The Discipline of the Supreme Person) — Chapter 15 (Bhagavadgītā
सम्बन्ध--इस प्रकार भगवान्के मुखसे सब बातें सुननेके बाद अर्जुनकी कैसी परिस्थिति हुई और उन्होंने क्या किया--इस जिज्ञासापर संजय कहते हैं संजय उवाच एतच्छुत्वा वचनं केशवस्य कृताञ्जलिवेंपमान: किरीटीरें | नमस्कृत्वा भूय एवाह कृष्णं सगदगदं भीतभीत: प्रणम्य,संजय बोले--केशव भगवान्के इस वचनको सुनकर मुकुटधारी अर्जुन हाथ जोड़कर काँपता हुआ* नमस्कार करके, फिर भी अत्यन्त भयभीत होकर प्रणाम करके* भगवान् श्रीकृष्णके प्रति गदूगद वाणीसे बोलाः
sañjaya uvāca | etac chrutvā vacanaṁ keśavasya kṛtāñjalir vepamānaḥ kirīṭī | namaskṛtvā bhūya evāha kṛṣṇaṁ sa-gadgadaṁ bhīta-bhītaḥ praṇamya ||
সঞ্জয় ক’লে—কেশৱৰ এই বাক্য শুনি মুকুটধাৰী অৰ্জুন কৰজোড়ে কঁপি উঠিল। তেওঁ নমস্কাৰ কৰিলে; আৰু ভয়-বিস্ময়ে অভিভূত হৈ পুনৰ পুনৰ প্ৰণাম কৰি, গদগদ কণ্ঠে শ্ৰীকৃষ্ণক সম্বোধন কৰিলে।
संजय उवाच