Kṣetra–Kṣetrajña-Jñāna–Jñeya-Viveka
Field, Knower, Knowledge, and the Knowable
अक्षराणामकारो<स्मि द्वन्दः सामासिकस्य च | अहमेवाक्षय: कालो धाताहं विश्वतोमुख:,मैं अक्षरोंमें अकार* हूँ और समासोंमें द्वन्द्ध/ नामक समास हूँ। अक्षय काल* अर्थात् कालका भी महाकाल तथा सब ओर मुखवाला विराट्स्वरूप, सबका धारण-पोषण करनेवाला भी मैं ही हूँ
akṣarāṇām akāro 'smi dvandvaḥ sāmāsikasya ca | aham evākṣayaḥ kālo dhātāhaṁ viśvatomukhaḥ ||
অক্ষৰসমূহৰ মাজত মই ‘অকাৰ’; সমাসসমূহৰ মাজত মই দ্বন্দ্ব-সমাস। মই নিজেই অক্ষয় কাল (মহাকাল); আৰু সকলো দিশে মুখ থকা, সকলোকে ধৰি পোষণ কৰা বিরাট্ স্বৰূপও মই।
अजुन उवाच