निमीलिताक्षं तं वीरं॑ साश्रुकण्ठस्तदा वृष: | भीष्म भीष्म महाबाहो इत्युवाच महाद्युति:,वीर भीष्मके नेत्र बंद थे। उन्हें देखकर महातेजस्वी कर्णकी आँखोंमें आँसू छलक आये और अभश्रुगदगदकण्ठ होकर उसने कहा--'भीष्म! भीष्म! महाबाहो! कुरुश्रेष्ठ! मैं वही राधापुत्र कर्ण हूँ, जो सदा आपकी आँखोंमें गड़ा रहता था और जिसे आप सर्वत्र द्वेषदृष्टिसे देखते थे।” कर्णने यह बात उनसे कही
sañjaya uvāca | nimīlitākṣaṃ taṃ vīraṃ sāśrukaṇṭhas tadā vṛṣaḥ | bhīṣma bhīṣma mahābāho ity uvāca mahādyutiḥ ||
বীৰ ভীষ্মৰ চকু নিমীলিত আছিল। তেওঁক দেখি মহাতেজস্বী কৰ্ণৰ কণ্ঠ অশ্ৰুত গদগদ হৈ উঠিল; আৰু তেওঁ ব্যাকুল হৈ ক’লে—“ভীষ্ম! ভীষ্ম! মহাবাহো!”
संजय उवाच