नूनं सप्ताश्वयुक्तेन रथेनोत्तमतेजसा । विमोक्ष्येडहं तदा प्राणान् सुहृदः सुप्रियानिव,'सात घोड़ोंसे जुते हुए उत्तम तेजस्वी रथके द्वारा जब सूर्य कुबेरकी निवासभूत उत्तरदिशाके पथपर आ जायाँगे, उस समय जो राजा मेरे पास आयेंगे, वे मेरी ऊर्ध्व गतिको देख सकेंगे। निश्चय ही उसी समय मैं अत्यन्त प्रियतम सुहृदोंकी भाँति अपने प्यारे प्राणोंका त्याग करूँगा
nūnaṃ saptāśvayuktena rathenottamatejasā | vimokṣye'haṃ tadā prāṇān suhṛdaḥ supriyān iva ||
নিশ্চয়, সাত অশ্বযুক্ত পৰম তেজস্বী ৰথত আৰূঢ় সূৰ্য যেতিয়া উত্তৰায়ণ-পথলৈ প্ৰবৃত্ত হ’ব, তেতিয়া মই মোৰ প্ৰাণ ত্যাগ কৰিম—যেন অতি প্ৰিয় সুহৃদসকলৰ পৰা বিদায় লোৱা হয়।
संजय उवाच