तमब्रवीच्छान्तनव: शिरो मे तात लम्बते । उपधान कुरुश्रेष्ठ फाल्गुनोपदधत्स्व मे,तब शान्तनुनन्दनने उनसे कहा--“तात! मेरा सिर लटक रहा है। कुरुश्रेष्ठ फाल्गुन! तुम मेरे लिये तकिया लगा दो
tam abravīc chāntanavaḥ: śiro me tāta lambate | upadhāna kuruśreṣṭha phālgunopadadhatsva me ||
তেতিয়া শান্তনুনন্দনে ক’লে—তাত, মোৰ মূৰ ঢলি পৰিছে। হে কুৰুশ্ৰেষ্ঠ ফাল্গুণ! মোৰ বাবে উপধান থৈ দিয়া।
संजय उवाच