उपहार-विधानम्, यक्षपूजा, रत्ननिध्युद्धारः
Offerings to Tryambaka; Yakṣa honors; Excavation of the Treasure
कारयित्वा स राजेन्द्रो ब्राह्मणानिदमब्रवीत् । ब्राह्मणोंने जो छावनी वहाँ बनायी थी, उसमें पूर्वसे पश्चिमको और उत्तरसे दक्षिणको जानेवाली तीन-तीनके क्रमसे कुल छ: सड़कें थीं तथा उस छावनीके नौ खण्ड थे। महाराज युधिष्ठिरने मतवाले गजराजोंके रहनेके लिये भी स्थानका विधिवत् निर्माण कराकर ब्राह्मणोंसे इस प्रकार कहा--
kārayitvā sa rājendro brāhmaṇān idam abravīt |
সকলো প্ৰয়োজনীয় ব্যৱস্থা বিধিমতে কৰাই ৰাজেন্দ্ৰ যুধিষ্ঠিৰে ব্ৰাহ্মণসকলক এইদৰে ক’লে।
वैशम्पायन उवाच