Pañcahotṛ-Vidhāna and the Dispute of the Five Vāyus (पञ्चहोतृविधानम् — पञ्चवायूनां श्रेष्ठत्वविवादः)
प्राण, अपान, उदान, समान और व्यान--ये पाँचों प्राण पाँच होता हैं। विद्वान् पुरुष इन्हें सबसे श्रेष्ठ मानते हैं ।। ब्राह्मण्युवाच स्वभावात् सप्तहोतार इति मे पूर्विका मति: । यथा वै पञ्चहोतार: परो भावस्तदुच्यताम्,ब्राह्मणी बोली--नाथ! पहले तो मैं समझती थी कि स्वभावतः सात होता हैं; किंतु अब आपके मुँहसे पाँच होताओंकी बात मालूम हुई। अतः ये पाँचों होता किस प्रकार हैं? आप इनकी श्रेष्ठताका वर्णन कीजिये
brāhmaṇy uvāca | svabhāvāt sapta-hotāra iti me pūrvikā matiḥ | yathā vai pañca-hotāraḥ paro bhāvas tad ucyatām ||
ব্ৰাহ্মণী ক’লে—নাথ! আগতে মোৰ ধাৰণা আছিল যে স্বভাৱতঃ সাতজন হোতা আছে; কিন্তু এতিয়া আপোনাৰ বাক্যৰ পৰা পাঁচ হোতাৰ কথা জানিলোঁ। তেন্তে এই পাঁচ হোতা কেনেকৈ বুজিব? অনুগ্ৰহ কৰি তেওঁলোকৰ শ্ৰেষ্ঠতা বৰ্ণনা কৰক।
ब्राह्मण उवाच