कुन्ती–व्याससंवादः
Kuntī–Vyāsa Dialogue on Durvāsā’s Boon and Karṇa’s Birth
भरतश्रेष्ठ! वे राजा गंगाके तटपर, जैसा कि मैंने तुम्हें बताया है, उस अपनी ही अग्निसे दग्ध हुए हैं ।। एवमावेदयामासुर्मुनयस्ते ममानघ । ये ते भागीरथीतीरे मया दृष्टा युधिष्ठिर,निष्पाप नरेश! गंगाजीके तटपर मुझे जिनके दर्शन हुए थे, उन मुनियोंने मुझसे ऐसा ही बताया था
হে ভৰতশ্ৰেষ্ঠ! মই যেনেকৈ তোমাক কৈছিলোঁ, সেই ৰজা গংগা তীৰত নিজৰেই অগ্নিত দগ্ধ হ’ল। হে নিষ্পাপ নৰেশ যুধিষ্ঠিৰ! ভাগীৰথী তীৰত মই যিসকল মুনিক দেখিছিলোঁ, তেওঁলোকেই মোক এই কথাই জনাইছিল।
नारद उवाच