अध्याय ७४: अक्रोध–क्षमा–निवासनीति
Chapter 74: Non-anger, Forbearance, and the Ethics of Residence
अन्न ते हृदयं वेद सत्यस्यैवानृतस्य च । कल्याणं वद साक्ष्येण मा55त्मानमवमन्यथा:,“इस विषयमें यहाँ क्या झूठ है और क्या सच, इस बातको आपका हृदय ही जानता होगा। उसीको साक्षी बनाकर--हृदयपर हाथ रखकर सही-सही बात कहिये, जिससे आपका कल्याण हो। आप अपने आत्माकी अवहेलना न कीजिये
“এই বিষয়ত সত্য কি আৰু অসত্য কি—সেয়া আপোনাৰ অন্তঃকৰণেই জানে। তাক সাক্ষী কৰি কল্যাণকাৰী সত্য কওক; নিজৰ আত্মাক অৱমাননা নকৰিব।”
दुष्यन्त उवाच