आदि पर्व, अध्याय 67 — गान्धर्वविवाह-समयः
Duḥṣanta–Śakuntalā: Gandharva Marriage and Succession Condition
नातिहस्वा न महती नीलोत्पलसुगन्धिनी । पद्मायताक्षी सुश्रोणी स्वसिताज्चितमूर्थजा,वह न तो बहुत छोटी थी और न बहुत बड़ी ही। उसके अंगोंसे नीलकमलकी सुगन्ध फैलती रहती थी। उसके नेत्र कमलदलके समान सुन्दर और विशाल थे, नितम्बभाग बड़ा ही मनोहर था और उसके काले-काले घूँघराले बालोंका सौन्दर्य भी अद्भुत था
nātihasvā na mahatī nīlotpalasugandhinī | padmāyatākṣī suśroṇī svasitāś citamūrdhajā ||
বৈশম্পায়নে ক’লে—তাই ন অতিশয় খৰ্ব, ন অতিশয় দীঘল। তাইৰ অঙ্গৰ পৰা নীলপদ্মৰ দৰে সুগন্ধ ওলাই থাকিল। তাইৰ চকু পদ্মপত্ৰৰ দৰে ডাঙৰ আৰু মনোহৰ; নিতম্ব সুশোভিত; আৰু ক’লা, কুঁকুৰা কেশ অপূৰ্ব শোভাৰে দীপ্ত আছিল।
वैशम्पायन उवाच