विफल क्रियमाणं तत् समवेक्ष्य शतक्रतुः । भूय: संवर्धयामास तद्वर्ष पाकशासन:,अर्जुनने अत्यन्त अमर्षमें भरकर अपने बार्णोद्वारा वह सारी वर्षा नष्ट कर दी। सौ यज्ञोंका अनुष्ठान करनेवाले पाकशासन इन्द्रने उस पत्थरोंकी वर्षाको विफल हुई देख पुनः पत्थरोंकी बड़ी भारी वर्षा की
viphala-kriyamāṇaṃ tat samavekṣya śatakratuḥ | bhūyaḥ saṃvardhayāmāsa tadvarṣa pākaśāsanaḥ ||
সেই চেষ্টা নিষ্ফল হোৱা দেখি শতক্ৰতু, পাকশাসন ইন্দ্ৰে সেই শিলাবৃষ্টিক পুনৰ অধিক বঢ়ালে।
वैशम्पायन उवाच