अग्निभय-प्रसङ्गे मन्दपालस्य शोकः
Mandapāla’s Lament amid the Threat of Fire
तत: पावकमन्रूतां प्रहष्टावर्जुनाच्युतौ । कृतास्त्रौ शस्त्रसम्पन्नो रथिनौ ध्वजिनावपि,इसके बाद अस्त्रविद्याके ज्ञाता एवं शस्त्रसम्पन्न अर्जुन और श्रीकृष्णने प्रसन्न होकर अग्निदेवसे कहा--“भगवन्! अब हम दोनों रथ और ध्वजासे युक्त हो सम्पूर्ण देवताओं तथा असुरोंसे भी युद्ध करनेमें समर्थ हो गये हैं; फिर तक्षक नागके लिये युद्धकी इच्छा रखनेवाले अकेले वज्रधारी इन्द्रसे युद्ध करना क्या बड़ी बात है?”
tataḥ pāvakam anrūtāṁ prahṛṣṭāv arjunācyutau | kṛtāstrau śastrasampanno rathinau dhvajināv api ||
তাৰ পিছত প্ৰহৃষ্ট অৰ্জুন আৰু অচ্যুত (শ্ৰীকৃষ্ণ) পাৱকক ক’লে। দুয়ো দিৱ্যাস্ত্ৰত সিদ্ধ, শস্ত্ৰসম্পন্ন, ৰথাৰূঢ় আৰু ধ্বজধাৰী হৈছিল।
वैशम्पायन उवाच