Draupadī-vivāha-vidhāna
The Ritual Formalization of Draupadī’s Marriage
वैशम्पायन उवाच स एवमुक्तो मतिमान् नृवीरो मात्रा मुहूर्त तु विचिन्त्य राजा । कुन्तीं समाश्वास्य कुरुप्रवीरो धनंजयं वाक्यमिदं बभाषे,वैशम्पायनजी कहते हैं--राजन्! कुरुश्रेष्ठ नरवीर राजा युधिष्ठिर बड़े बुद्धिमान् थे। उन्होंने माताकी यह बात सुनकर दो घड़ीतक (मन-ही-मन) कुछ विचार किया। फिर कुन्तीदेवीको भलीभाँति आश्वासन देकर उन्होंने धनंजयसे यह बात कही--
Vaiśampāyana uvāca: sa evam ukto matimān nṛvīro mātrā muhūrtaṁ tu vicintya rājā | Kuntīṁ samāśvāsya kurupravīro dhanañjayaṁ vākyam idaṁ babhāṣe ||
বৈশম্পায়নে ক’লে—মাতৃবাক্য শুনি বুদ্ধিমান আৰু বীৰ কুৰুশ্ৰেষ্ঠ ৰজা যুধিষ্ঠিৰে কিছুক্ষণ মনতে চিন্তা কৰিলে। তাৰ পিছত কুন্তীক আশ্বস্ত কৰি সেই কুৰুপ্ৰবীৰে ধনঞ্জয় (অৰ্জুন)ক এই কথা ক’লে।
वैशम्पायन उवाच