आदि पर्व — अध्याय १०६
Pāṇḍu’s Gifts, Forest Residence, and Vidura’s Marriage
ऋषिमावाहयत् सत्या यथा पूर्वमरिंदम । ततस्तेनैव विधिना महर्षिस्तामपद्यत,प्रसवका समय आनेपर कौसल्याने उसी अन्धे पुत्रको जन्म दिया। जनमेजय! तत्पश्चात् देवी सत्यवतीने अपनी दूसरी पुत्रवधूको समझा-बुझाकर गर्भाधानके लिये तैयार किया और इसके लिये पूर्ववत् महर्षि व्यासका आवाहन किया। फिर महर्षिने उसी (नियोगकी संयमपूर्ण) विधिसे देवी अम्बालिकाके साथ समागम किया। भारत! महर्षि व्यासको देखकर वह भी कान्तिहीन तथा पाण्डुवर्णकी-सी हो गयी
ṛṣim āvāhayat satyā yathā pūrvam ariṃdama | tatas tenaiva vidhinā maharṣis tām apadyata ||
বৈশম্পায়নে ক’লে—হে অরিন্দম! সত্যা (সত্যৱতী) পূৰ্বৰ দৰে ঋষিক আহ্বান কৰিলে। তাৰ পাছত সেই একে বিধিতেই মহর্ষি তাইক (নিয়োগাৰ্থে) সমীপ কৰিলে।
वैशम्पायन उवाच