तस्मान्निमन्त्रये5हं ते दुहितां मनुजाधिप । शुद्धों जितेन्द्रियो दान्तस्तस्या: शुद्धि: कृता मया,महाराज! वह संदेह न हो, इसके लिये मैं आपकी पुत्रीको पुत्रवधूके रूपमें ही ग्रहण करूँगा। ऐसा होनेपर ही मैं शुद्धचरित्र, जितेन्द्रिय तथा मनको दमन करनेवाला समझा जाऊँगा और इसीसे मेरे द्वारा आपकी कन्याके चरित्रकी शुद्धि स्पष्ट हो जायगी
قال أرجونا: «لذلك، يا ملك البشر، كي لا يبقى موضعُ ريبة، فإني أقبل ابنتك على أنها كنّةٌ (زوجةٌ لابني). عندئذٍ أُعَدُّ طاهرَ السيرة، غالبًا لحواسي، مروِّضًا لنفسي؛ وبهذا يتجلّى على يدي صفاءُ سمعة ابنتك وطهارةُ شأنها.»
अजुन उवाच