Arjuna’s Approach, Drona’s Recognition, and the Turning of the Cattle (अर्जुनागमनम्, द्रोणवाक्यम्, गोगमनिवृत्तिः)
अश्ववेगपुरोवातो रथौघस्तनयित्नुमान् । शरधारो महामेघ: शमयिष्यामि पाण्डवम्,जो अग्निकी भाँति दुर्धर्ष है, खड़ग, शक्ति और बाणरूपी ईंधनसे प्रज्वलित है और अपने शत्रुको भस्म कर रही है, उस अर्जुनरूपी जलती हुई आगको आज मैं महामेघ बनकर बुझा दूँगा। मेरे अश्वोंका वेग ही पुरवैया हवाका काम करेगा। रथसमूहकी घर्घराहट ही बादलोंकी गम्भीर गर्जनगा होगी और बाणोंकी धारा ही जलधाराका काम करेगी
aśvavegapurovāto rathaughastanayitnumān | śaradhāro mahāmeghaḥ śamayīṣyāmi pāṇḍavam ||
قال كارنا: «سأجعل سرعة خيولي ريحًا دافعة، وزئير جموع مركباتي رعدَ السحاب، وسيلَ سهامي مطرًا منهمرًا؛ فأصير سحابة عاصفة عظيمة وأُخمد ذلك الباندافي (أرجونا) المتّقد.»
कर्ण उवाच