आचार्य-क्षमा, देśa–kāla-नīti, तथा भेद-दोषः
Teacher-Reconciliation, Timing-Policy, and the Fault of Factionalism
अजुन उवाच एकान्तं रथमास्थाय पद्धयां त्वमवपीडयन् । दृढं च रश्मीन् संयच्छ शड्खं ध्मास्याम्यहं पुन:,अर्जुन बोले--राजकुमार! अब तुम रथपर अच्छी तरह जमकर बैठ जाओ और अपनी टाँगोंसे बैठनेके स्थानको जकड़ लो। साथ ही घोड़ोंकी रासको दृढ़तापूर्वक पकड़े रहो। मैं फिर शंख बजाऊँगा
قال أرجونا: «يا أيها الأمير، اثبت الآن على العربة واجلس بإحكام واضغط بقدميك على موضع الجلوس. وأمسك زمام الخيل بقوة. سأ吹 الصدفة مرة أخرى.»
अजुन उवाच