कृपवाक्यं तथा नीत्युपदेशः
Kṛpa’s Counsel and a Discourse on Statecraft
त्यक्तवाक्यानृतस्तात शुभकल्याणमड़ल: । शुभार्थेप्सु: शुभमतिर्यत्र राजा युधिष्ठिर:,“तात! जहाँ राजा युधिष्छिर रहते होंगे, वहाँके लोग असत्यभाषणका त्याग करनेवाले, शुभ, कल्याण एवं मंगलसे युक्त, शुभ वस्तुओंकी प्राप्तिके इच्छुक तथा शुभमें ही मन लगानेवाले होंगे
«يا بُنيّ! حيث يقيم الملك يودهيشثيرا يترك الناس قول الزور، ويكونون ذوي خيرٍ وبركةٍ ويُمن. يبتغون ما هو صالح، ولا يعلّقون قلوبهم إلا بما هو مبارك.»
वैशम्पायन उवाच