अगस्त्यस्य वित्तयाचनं तथा इल्वलोपभिक्षणनिर्णयः
Agastya’s request for wealth and the decision to seek resources from Ilvala
#:73...8 #::3-:.:.7 () ऑञिेजा आ।ा८ज - यहाँ पाण्डवोंके द्वारा गोदान और धनदान करनेके विषयमें यह शंका होती है कि इनके पास ये सब कहाँसे आये पर ऐसी शंका नहीं करनी चाहिये; क्योंकि वनपर्वके बारहवें अध्यायमें आता है कि काम्यकवनमें पाण्डवोंसे मिलनेके लिये भगवान् श्रीकृष्ण एवं भोजवंशी, वृष्णिवंशी और अन्धककुलके राजागण तथा ट्रुपद, धृष्टद्युम्न, धृष्टकेतु एवं केकय राजकुमार आये थे। उनका पाण्डवोंसे मिलकर अपने-अपने राज्यमें लौट जानेका भी वर्णन वनपर्वके बाईसवें अध्यायमें आया है। इससे अनुमान होता है कि इन राजाओंने पाण्डवोंको भेंटमें प्रचुर धन दिया होगा। षण्णवतितमोब< ध्याय: इल्वचल और वातापिका वर्णन, महर्षि अगस्त्यका पितरोंके उद्धारके लिये विवाह करनेका विचार तथा विदर्भराजका महर्षि अगस्त्यसे एक कन्या पाना वैशम्पायन उवाच ततः सम्प्रस्थितो राजा कौन्तेयो भूरिदक्षिण: । अगस्त्याश्रममासाद्य दुर्जयायामुवास ह,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! तदनन्तर प्रचुर दक्षिणा देनेवाले कुन्तीनन्दन राजा युधिष्ठिरने गयासे प्रस्थान किया और अगस्त्याश्रममें जाकर दुर्जय मणिमती नगरीमें निवास किया
Vaiśampāyana uvāca: tataḥ samprasthito rājā kaunteyo bhūridakṣiṇaḥ | Agastyāśramam āsādya durjayāyām uvāsa ha ||
قال فايشَمبايَنَة: ثم إنّ الملك المولود من كونتي (يودهيشثيرا)، المشهور بكثرة العطايا، ارتحل من هناك. فلمّا بلغ أشرم أغاستيا أقام في المدينة المسماة «دُرجايا».
वैशम्पायन उवाच
A righteous king sustains dharma through generosity and by seeking the guidance and sanctity of sages; even in hardship, ethical conduct and reverence for spiritual authority remain central.
After departing from the previous location, Yudhiṣṭhira travels to Agastya’s hermitage and stays in a place called Durjayā, marking a new stage in the Pāṇḍavas’ forest-exile journey connected with meeting great ṛṣis.