Adhyāya 73: Damayantī’s Investigation of Bāhuka
Keśinī’s Observations
पश्चादुदर्के ज्ञास्यामि कारणं यद् भविष्यति । नैतदेवं स नृपतिस्तं सत्कृत्य व्यसर्जयत्,“अच्छा, जो भी कारण होगा पीछे मालूम कर लूँगा। ये जो कारण बता रहे हैं, इतना ही इनके आगमनका हेतु नहीं है।' ऐसा विचारकर राजाने उन्हें सत्कारपूर्वक विश्रामके लिये विदा किया
«سأعرف لاحقًا سبب ما سيقع.» ثم فكّر الملك: «إن العلة التي يذكرونها ليست وحدها باعث قدومهم.» فاستقبلهم بإكرامٍ وتوقير، ثم أذن لهم بالانصراف إلى الراحة.
बृहदश्चव उवाच