Vidura’s Recall from Kāmyaka-vana and Reconciliation with Dhṛtarāṣṭra (विदुरानयनम् / क्षमायाचनम्)
#2:8 #:23:.7 () हि २ 7 सप्तमो<्ध्याय: दुर्योधन, दःशासन, शकुनि और कर्णकी सलाह, पाण्डवोंका वध करनेके लिये उनका वनमें जानेकी तैयारी तथा व्यासजीका आकर उनको रोकना वैशम्पायन उवाच श्र॒ुत्वा च विदुरं प्राप्त राज्ञा च परिसान्त्वितम् । धृतराष्ट्रात्मजो राजा पर्यतप्यत दुर्मति:,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! विदुर आ गये और राजा धूृतराष्ट्रने उन्हें सान्त्वना देकर रख लिया, यह सुनकर दुष्ट बुद्धिवाला धृतराष्ट्रकुमार राजा दुर्योधन संतप्त हो उठा
vaiśampāyana uvāca | śrutvā ca viduraṃ prāptaṃ rājñā ca parisāntvitam | dhṛtarāṣṭrātmajo rājā paryatapyata durmatiḥ ||
قال فايشامبايانا: «يا جاناميجايا، لما سمع دوريوذانا أن فيدورا قد قدم، وأن الملك دْهريتاراشترا قد هدّأه وطمأنه، اشتعل الملك—ابن دْهريتاراشترا—كمدًا وضيقًا، وقد مال قلبه إلى الشرّ».
वैशम्पायन उवाच