कर्कोटक-उपदेशः
Karkoṭaka’s Counsel and Nala’s Concealment
तामेवं श्लक्षणया वाचा लुब्धको मृदुपूर्वया । सान्त्वयामास कामार्तस्तदबुध्यत भाविनी,वह मधुर एवं कोमल वाणीसे उसे अपने अनुकूल बनानेके लिये भाँति-भाँतिके आश्वासन देने लगा। वह व्याध उस समय कामवेदनासे पीड़ित हो रहा था। सती दमयन्तीने उसके दूषित मनोभावको समझ लिया
وكان الصياد، وقد أضناه لهيب الشهوة، يلاطفها بكلامٍ لينٍ مصقول، ويغدق عليها ضروب الوعود ليجعلها على هواه؛ غير أن دَمَيَنْتِي العفيفة أدركت ما في نفسه من فساد.
ब॒हृदश्चव उवाच