अक्षद्यूतप्रवेशः — Kali’s Entry and the Initiation of the Dice-Contest
ततो बाष्पाकुलां वाचं दमयन्ती शुचिस्मिता । प्रत्याहरन्ती शनकैर्नलं राजानमब्रवीत्,यह सुनकर पवित्र मुसकानवाली दमयन्ती राजा नलसे धीरे-धीरे अश्लुगद्गदवाणीमें बोली--“नरेश्वर! मैंने उस निर्दोष उपायको दूँढ़ निकाला है, राजन! जिससे आपको किसी प्रकार दोष नहीं लगेगा
ثم إن دمايانتي، ذات الابتسامة الطاهرة، خاطبت الملك نالا رويدًا رويدًا بصوتٍ مخنوقٍ بالدمع: «يا ملك البشر، لقد اهتديتُ إلى حيلةٍ لا عيب فيها، أيها الملك—حيلةٍ لا تلحق بك بسببها تَبِعةٌ ولا ذنب».
बृहदश्व उवाच