Nala’s Embassy to Damayantī and the Gods’ Proposal (नलस्य दूतत्वं देवप्रस्तावश्च)
निकृत्या निकृतिप्रज्ञा हन्तव्या इति निश्चय: । न हि नैकृतिकं हत्वा निकृत्या पापमुच्यते,'शठता करने या जाननेवाले शत्रुओंको शठताके द्वारा ही मारना चाहिये, यह एक सिद्धान्त है। जो स्वयं दूसरोंपर छल-कपटका प्रयोग करता है, उसे छलसे भी मार डालनेमें पाप नहीं बताया गया है
«مَن يمارس الخديعة ويُحسنها يجب أن يُقتل بالخديعة—ذلك هو الحكمُ المقطوع به. إذ إن قتلَ المخادع بالمكر لا يُعَدُّ إثمًا.»
वैशम्पायन उवाच