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Shloka 26

Mātali’s Arrival and Arjuna’s Ascent toward Amarāvatī (मातलिसंयुक्तरथागमनम् तथा इन्द्रलोकगमनारम्भः)

स्मयन्निव गुडाकेशं प्रेक्षमाण: सहस्रदूक्‌ । हर्षेणोत्फुल्लनयनो न चातृप्यत वृत्रहा,सहसख््र नयनोंसे सुशोभित वृत्रसूदन इन्द्र निद्राविजयी अर्जुनको मुसकराते हुए-से देख रहे थे। उस समय इन्द्रकी आँखें हर्षसे खिल उठी थीं। वे उन्हें देखनेसे तृप्त नहीं होते थे

وكان إندرا قاتلَ فِرِترا، ذو الألف عين، ينظر إلى غوداكيشا كأنما يبتسم. وقد تفتّحت عيناه فرحًا، ولم يكن يشبع من النظر إليه.

स्मयन्smiling
स्मयन्:
Karta
TypeVerb
Rootस्मि (धातु)
Formशतृ (वर्तमान कृदन्त), पुं, प्रथमा, एकवचन
इवas if
इव:
TypeIndeclinable
Rootइव
गुडाकेशम्Gudakesha (Arjuna)
गुडाकेशम्:
Karma
TypeNoun
Rootगुडाकेश (प्रातिपदिक)
Formपुं, द्वितीया, एकवचन
प्रेक्षमाणःlooking at
प्रेक्षमाणः:
Karta
TypeVerb
Rootप्र + ईक्ष् (धातु)
Formशानच् (वर्तमान कृदन्त), पुं, प्रथमा, एकवचन
सहस्रदृक्the thousand-eyed one (Indra)
सहस्रदृक्:
Karta
TypeNoun
Rootसहस्रदृश्/सहस्रदृक् (प्रातिपदिक)
Formपुं, प्रथमा, एकवचन
हर्षेणwith joy
हर्षेण:
Karana
TypeNoun
Rootहर्ष (प्रातिपदिक)
Formपुं, तृतीया, एकवचन
उत्फुल्लनयनःwith eyes blossomed (bright) with delight
उत्फुल्लनयनः:
Karta
TypeAdjective
Rootउत्फुल्लनयन (प्रातिपदिक)
Formपुं, प्रथमा, एकवचन
not
:
TypeIndeclinable
Root
and
:
TypeIndeclinable
Root
अतृप्यत्was not satisfied
अतृप्यत्:
TypeVerb
Rootतृप् (धातु)
Formलङ् (अनद्यतन भूत), परस्मैपद, प्रथम, एकवचन
वृत्रहाVritra-slayer (Indra)
वृत्रहा:
Karta
TypeNoun
Rootवृत्रहन् (प्रातिपदिक)
Formपुं, प्रथमा, एकवचन

वैशम्पायन उवाच