वहाँ सारसोंसे घिरे हुए जलाशयका स्वच्छ जल देखकर नकुलको उसे पीनेकी इच्छा हुई। इतनेमें ही आकाशसे उनके कानोंमें एक स्पष्ट वाणी सुनायी दी ।। यक्ष उवाच मा तात साहसं कार्षीमम पूर्वपरिग्रह: । प्रश्नानुक्त्वा तु माद्रेय ततः पिब हरस्व च,यक्ष बोला--तात! तुम इस सरोवरका पानी पीनेका साहस न करो। इसपर पहलेसे ही मेरा अधिकार हो चुका है। माद्रीकुमार! पहले मेरे प्रश्नोंका उत्तर दे दो, फिर पानी पीओ और ले भी जाओ
yakṣa uvāca | mā tāta sāhasaṁ kārṣīr mamāyaṁ pūrva-parigrahaḥ | praśnān uktvā tu mādreya tataḥ piba harasva ca ||
قال الياكشا: «يا بُنيّ، لا تُقدِم بطيش. هذه البحيرة قد سُبِقتُ إلى تملّكها. يا ابن مادري، أجب عن أسئلتي أولًا؛ ثم اشرب، وخذ الماء معك أيضًا.»
यक्ष उवाच