Sāvitrī’s Trirātra-Vrata and Departure with Satyavān (सावित्रीव्रतनिश्चयः सहगमनं च)
ततो ददृशतुस्तौ त॑ छिन्नपक्षद्धयं खगम् । तयो: शशंस गृध्रस्तु सीतार्थे रावणाद् वधम्,तदनन्तर उन्होंने पास आकर देखा--जटायुके दोनों पंख कटे हुए हैं। गृध्रने बताया कि 'सीताको छुड़ानेके लिये युद्ध करते समय मैं रावणके हाथसे अत्यन्त घायल कर दिया गया हूँ!
ثم رأى الاثنان طائرًا قد قُطِع جناحاه. وروى النسرُ أنه حين قاتل من أجل سيتا أُصيب إصابةً بالغة على يد رافانا.
मार्कण्डेय उवाच