Draupadī’s Lament and the Question of Kṣatriya Forbearance (द्रौपद्याः शोकप्रलापः क्षमानिर्णयश्च)
मृदुना दारुणं हन्ति मृदुना हन्त्यदारुणम् नासाध्यं मृदुना किंचित् तस्मात् तीव्रतरं मृदु,मनुष्य कोमलभाव (सामनीति)-के द्वारा उग्र स्वभाव तथा शान्त स्वभावके शत्रुका भी नाश कर देता है; मृदुतासे कुछ भी असाध्य नहीं है। अतः मृदुतापूर्ण नीतिको तीव्रतर (उत्तम) समझे
باللِّين يُقهر العنيف، وباللِّين يُقهر غير العنيف أيضًا. لا شيء يعجز عنه اللِّين؛ فلذلك عُدَّت سياسة الرفق أشدَّ مضاءً وأفضل.
प्रह्माद उवाच