अरण्यकपर्व — मार्कण्डेयकथिते रामविजयः, सीताशुद्धिः, अयोध्याप्रत्यागमनवर्णनम्
Rāma’s victory, Sītā’s vindication, and return to Ayodhyā as told by Mārkaṇḍeya
हि >> आय ० () है 7 चतुःसप्तत्याधिकद्विशततमो<ध्याय: श्रीराम आदिका जन्म तथा कुबेरकी उत्पत्ति और उन्हें ऐश्वर्यकी प्राप्ति मार्कण्डेय उवाच प्राप्तमप्रतिमं दु:खं रामेण भरतर्षभ । रक्षसा जानकी तस्य हृता भार्या बलीयसा,मार्कण्डेयजीने कहा--भरतश्रेष्ठ! श्रीरामचन्द्रजीको भी वनवास तथा स्त्रीवियोगका अनुपम दु:ख सहन करना पड़ा था। दुरात्मा राक्षसराज महाबली रावण अपना मायाजाल बिछाकर आश्रमसे उनकी पत्नी सीताको वेगपूर्वक हर ले गया था और अपने कार्यमें बाधा डालनेवाले गृध्रराज जटायुको उसने वहीं मार गिराया था
Mārkaṇḍeya uvāca | prāptam apratimaṃ duḥkhaṃ rāmeṇa bharatarṣabha | rakṣasā jānakī tasya hṛtā bhāryā balīyasā ||
قال ماركاندييا: «يا خيرَ آلِ بهاراتا، إنّ راما نفسه قد احتمل حزنًا لا نظير له. فقد اختطف رَكْشَسٌ شديدُ البأس زوجتَه جانكي (سيتا).»
मार्कण्डेय उवाच