जयद्रथविमोचन–पलायनवृत्तान्तः
Recovery of Draupadī and Jayadratha’s flight
प्रीतो5स्मि तव राजेन्द्र विक्रमेण बलेन च । न ते विघ्नं करिष्यामि प्रतिज्ञां समपालयम्,“राजेन्द्र! मैं तुम्हारे बल और पराक्रमसे बहुत प्रसन्न हूँ। अतः तुम्हारे कार्यमें विघ्न नहीं डालूँगा। थोड़ी देर युद्ध करके मैंने केवल क्षत्रियधर्मका पालन किया है
«يا ملكَ الملوك! لقد سُرِرتُ ببأسك وقوّتك. فلن أضعَ عائقًا في سبيل أمرك؛ وسأفي بوعدي. وما كان ذلك القتال اليسير إلا أداءً لدارما الكشاتريا—واجب المحارب.»
वैशम्पायन उवाच