द्रौपदी–सत्यभामा संवादः
Draupadī and Satyabhāmā on ethical household conduct
इमानन्यान् समसृजत् पावकान् प्रथितान् भुवि । अन्निहोत्रस्य दुष्टस्य प्रायश्षित्तार्थमुल्वणान्,मनुने अग्निहोत्र कर्ममें की हुई त्रुटिके प्रायश्चित्त [समाधान)-के लिये इन लोकविख्यात तेजस्वी अग्नियोंकी सृष्टि की, जो पूर्वोक्त अग्नियोंसे भिन्न हैं
فخلقَ مانو هذه النيرانَ الأُخَر—المشهورةَ في الأرضِ المتألِّقةَ البهاء—المغايرةَ لما ذُكِرَ قبلَها، لتكونَ كفّارةً (prāyaścitta) عن الزلّاتِ الجسيمةِ التي تقعُ في عملِ طقسِ الأَغْنِيهوترا.
मार्कण्डेय उवाच