अग्निनाम-प्रादुर्भावः प्रायश्चित्त-विधानं च
Agni’s Epithets, Manifestations, and Expiation Procedures
व्याध उवाच ब्राह्मणा वै महाभागा: पितरोडग्रभुज: सदा । तेषां सर्वात्मना कार्य प्रियं लोके मनीषिणा,धर्मव्याधने कहा--ब्रह्मन! महाभाग ब्राह्मण और पितर ये सदा प्रथम भोजनके अधिकारी माने गये हैं। अतः बुद्धिमान् पुरुषको इस लोकमें सब प्रकारसे उनका प्रिय करना चाहिये
قال دارما-فياده: «أيها البراهمي المبارك، إن البراهمة والـPitṛ (الآباء الأسلاف) يُعَدّون دائمًا أصحابَ الحقّ في أن يُقدَّم لهم الطعام أولًا. فلذلك ينبغي للرجل الحكيم في هذا العالم أن يسعى بكل وجهٍ إلى إرضائهم».
व्याध उवाच