कृतयुगवर्णनम् तथा राजधर्मोपदेशः
Kṛtayuga Description and Instruction on Royal Dharma
सिन्धुं चैव विपाशां च नदीं गोदावरीमपि । वस्वोकसारां नलिनीं नर्मदां चैव भारत,नरश्रेष्ठ फिर तो मैं उस महात्मा बालकके उदरमें घूमने लगा। घूमते हुए मैंने वहाँ गंगा, सतलज, सीता, यमुना, कोसी, चम्बल, वेत्रवती, चिनाव, सरस्वती, सिन्धु, व्यास, गोदावरी, वस्वोकसारा, नलिनी, नर्मदा, ताम्रपर्णी, वेणा, शुभदायिनी पुण्यतोया, सुवेणा, कृष्णवेणा, महानदी इरामा, वितस्ता (झेलम), महानदी कावेरी, शोणभद्र, विशल्या तथा किम्पुना--इन सबको तथा इस पृथ्वीपर जो अन्य नदियाँ हैं, उनको भी देखा
sindhuṃ caiva vipāśāṃ ca nadīṃ godāvarīm api | vasvokasārāṃ nalinīṃ narmadāṃ caiva bhārata ||
قال فَيْشَمْبَايَنَة: «يا بهاراتا، أبصرتُ نهرَ سِندْهُو، وكذلك فِيباشا، ونهرَ غودافري؛ وكذلك فَسْفُوكَسارا، ونَلِينِي، ونَرْمَدا.»
वैशम्पायन उवाच