कामीकवन-समागमः
Kāmyaka Forest Meeting: Kṛṣṇa’s Visit; Mārkaṇḍeya and Nārada Arrive
विनष्टमथ मां श्र॒ुत्व भविष्यन्ति निरुद्यमा: धर्मशीला मया ते हि बाध्यन्ते राज्यगृद्धिना,“मेरी मृत्यु हुई सुनकर वे राज्य-प्राप्तिका सारा उद्योग छोड़ बैठेंगे। मेरे सभी भाई स्वभावतः धर्मात्मा हैं। मैं ही राज्यके लोभसे उन्हें युद्धके लिये बाध्य करता रहता हूँ
«إذا سمعوا بهلاكي فسيغدو عزمهم واهناً، ويتركون كل سعيٍ لاسترداد المملكة. إن إخوتي جميعاً أهلُ دَرْما بطبعهم؛ وأنا وحدي، لطمعٍ في المُلك، ما برحتُ أُلزمهم خوضَ الحرب.»
वैशम्पायन उवाच