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Shloka 12

कामीकवन-समागमः

Kāmyaka Forest Meeting: Kṛṣṇa’s Visit; Mārkaṇḍeya and Nārada Arrive

इमामवस्थां सम्प्राप्तो हाहं कोपान्मनीषिणाम्‌ शापस्यान्तं परिप्रेप्सु: सर्व तत्‌ कथयामि ते,“मैं मनीषी महात्माओंके कोपसे इस दुर्दशाको प्राप्त हुआ हूँ और इस शापके निवारणकी प्रतीक्षा करते हुए यहाँ रहता हूँ। शापका क्या कारण है? यह सब तुमसे कहता हूँ, सुनो

«لقد بلغتُ هذه الحال البائسة من جرّاء غضب الحكماء العظام؛ وأنا أقيم هنا مترقّبًا انقضاء هذه اللعنة. ما سببها؟ سأقصّه عليك كلَّه—فاستمع.»

वैशम्पायन उवाच