Bhīmasena’s Capture by the Serpent and Nahūṣa’s Self-Disclosure (भीमसेन-भुजङ्गग्रहणं नहुषोपाख्यानप्रस्तावः)
अधिष्ठाने न वाअनार्त: प्रयुजुजीत कदाचन प्रयोगेषु महान् दोषो ह्ुस्त्राणां कुरुनन्दन,“कोई लक्ष्य मिल जाय तो भी ऐसा मनुष्य कभी इनका प्रयोग न करे, जो स्वयं संकटमें न पड़ा हो। कुरुनन्दन! इन दिव्यास्त्रोंका अनुचितरूपमें प्रयोग करनेपर महान् दोष प्राप्त होता है
يا قُرونندَن! حتى لو أُصيب الهدف، فلا ينبغي لمن لم يقع هو نفسه في شدةٍ أو خطر أن يستعمل هذه الأسلحة الإلهية قطّ. فإن استعمالها على غير وجهها يجلب إثمًا عظيمًا.
वैशम्पायन उवाच