निवातकवचवधः — Arjuna’s Neutralization of the Nivātakavacas
Vajra-astra deployment
प्रविश्य तां पुरी दिव्यां देवगन्धर्वपृूजिताम्,तत्पश्चात् देव-गन्धर्वपूजित दिव्य अमरावतीपुरीमें प्रवेश करके मैंने हाथ जोड़कर सहस्र नेत्रोंवाले देवराज इन्द्रको प्रणाम किया। दाताओंमें श्रेष्ठ देवराज इन्द्रने प्रसन्न होकर मुझे अपने आधे सिंहासनपर स्थान दिया
ولمّا دخلتُ المدينة الإلهية التي تُعظّمها الآلهةُ والغندرفا، دنوتُ ويداي مضمومتان بخشوع، وسجدتُ لإندرا، ملكِ الآلهة ذي الألف عين. فسرَّ شَكْرا—وهو أكرمُ المعطين—ومنحني مقعدًا على نصف عرشه.
अजुन उवाच