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Shloka 138

Raibhya-putrayoḥ satra-vṛttāntaḥ — The Satra Episode of Raibhya’s Sons

Parāvasu and Arvāvasu

इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि तीर्थयात्रापर्वणि लोमशतीर्थयात्रायां यवक्रीतोपाख्याने अष्टात्रिंशधिकशततमो< ध्याय:,इस प्रकार श्रीमह्याभारत वनपर्वके अन्तर्गत तीर्थयात्रापर्वमें लोगशती र्थयात्राके प्रसंगमें यवक्रीतोपाख्यानविषयक एक सौ अड़तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ

«هكذا، في ‘المهابهارتا’، في ‘فانا بارفا’، ضمن ‘تيرثا-ياترا بارفا’، في سياق حجّ لوماشَ، في حكاية (أوباخيانا) يَفَكْرِيتا، ينتهي الفصل الثامن والثلاثون بعد المئة.»

लोगमश उवाच