मान्धातृ-जन्म-चरितम्
The Birth and Career Account of Māndhātṛ
हल नमः की 20८2 )३४३ प्रदेशिनीं ततो5स्यास्ये शक्र: समभिसंदधे । मामयं धास्यतीत्येवं भाषिते चैव वज्चिणा,तब इन्द्रने अपनी तर्जनी अंगुली बालकके मुँहमें डाल दी और कहा--“माम् अयं धाता ।” “अर्थात् यह मुझे ही पीयेगा” वज्रधारी इन्द्रके ऐसा कहनेपर इन्द्र आदि सब देवताओंने मिलकर उस बालकका नाम “मान्धाता” रख दिया। राजन! इन्द्रकी दी हुई प्रदेशिनी (तर्जनी) अंगुलिका रसास्वादन करके वह महातेजस्वी शिशु तेरह बित्ता बढ़ गया
ثم أدخل إندرا سبابته في فم الرضيع وقال: «هذا سيشربني»—أي سيكون غذاؤه مني. فلما قال إندرا حامل الصاعقة ذلك، اجتمعت الآلهة وسمّت الغلام «ماندهاتا». وبمذاق الجوهر من الإصبع التي منحها شَكْرَة، نما ذلك الطفل المتلألئ في الحال ثلاثة عشر شِبْرًا.
लोमश उवाच