Kṛṣṇa at Duryodhana’s House: Refusal of Hospitality and Departure to Vidura (कृष्णस्य धार्तराष्ट्रनिवेशनगमनम्)
नृशंसेन च वो युक्तांस्त्यजेयं शाश्वती: समा: । काले हि समनुप्राप्ते त्यक्तव्यमपि जीवनम्,“यदि ऐसा समय आनेपर भी तुम युद्ध नहीं करोगे तो यह व्यर्थ बीत जायगा। तुमलोग इस जगत्के सम्मानित पुरुष हो। यदि तुम कोई अत्यन्त घृणित कर्म कर डालोगे तो उस नृशंस कर्मसे युक्त होनेके कारण मैं तुम्हें सदाके लिये त्याग दूँगी। पुत्रो! तुम्हें तो समय आनेपर अपने प्राणोंको भी त्याग देनेके लिये उद्यत रहना चाहिये
nṛśaṃsena ca vo yuktāṃs tyajeyaṃ śāśvatīḥ samāḥ | kāle hi samanupprāpte tyaktavyam api jīvanam ||
قال فايشَمبايانا: «إن ارتكبتم فعلًا قاسيًا مُشينًا فسأتبرّأ منكم أبد الدهر، لأنكم ستتلطّخون بالوحشية. فإذا حضر الوقت اللائق وجب التخلي حتى عن الحياة.»
वैशम्पायन उवाच