धृतराष्ट्रस्य बलाबलचिन्ता
Dhṛtarāṣṭra’s Appraisal of Strength and Preference for Śama
दुर्योधनेयं चिन्ता मे शश्वन्न व्युपशाम्यति । सत्यं होतदहं मन्ये प्रत्यक्ष नानुमानत:,“वत्स दुर्योधन! मेरी यह चिन्ता कभी दूर नहीं होती है, क्योंकि तुम्हारा पक्ष दुर्बल है। मैं यह बात अनुमानसे नहीं कहता हूँ; प्रत्यक्ष देख रहा हूँ; अतः इसीको सत्य मानता हूँ
duryodhaneyaṁ cintā me śaśvān na vyupaśāmyati | satyaṁ hotad ahaṁ manye pratyakṣaṁ nānumānataḥ |
قال فايشَمبايانا: «إنّ قلقي على دوريوذانا لا يهدأ حقًّا. وأعدّ هذا حقًّا—لا استنتاجًا فحسب، بل مما أراه رؤيةً مباشرة.»
वैशम्पायन उवाच