Udyoga Parva Adhyāya 58 — Saṃjaya’s Audience and Kṛṣṇa’s Deterrent Counsel (संजय-प्रवेशः कृष्णवाक्यं च)
धनुर्गुणकिणाड्केन पाणिना शुभलक्षणम् | पादमानमयन् पार्थ: केशवं समचोदयत्,तब अर्जुनने जिसमें धनुषकी डोरीकी रगड़से चिह्न बन गया था, उस हाथसे भगवान् श्रीकृष्णके शुभसूचक लक्षणोंसे युक्त चरणको धीरे-धीरे दबाते हुए उन्हें मुझको उत्तर देनेके लिये प्रेरित किया
ثم إن أرجونا، بتلك اليد التي تركت فيها حبال القوس آثار الاحتكاك، أخذ يدلك برفق قدم كيشافا (كريشنا) ذات العلامات المباركة، وحثّه أن يجيبني.
संजय उवाच