अध्याय ३९: विदुरेण धृतराष्ट्राय नीत्युपदेशः
Timely Counsel, Association, and Kin-Duty
अग्नौ प्रास्तं तु पुरुषं कर्मान्वेति स्वयंकृतम् । तस्मात् तु पुरुषो यत्नाद् धर्म संचिनुयाच्छनै:,अग्निमें डाले हुए उस पुरुषके पीछे तो केवल उसका अपना किया हुआ बुरा या भला कर्म ही जाता है। इसलिये पुरुषको चाहिये कि वह धीरे-धीरे प्रयत्नपूर्वक धर्मका ही संग्रह करे
إذا أُلقي الرجل في النار، فإنما يتبعه عمله الذي صنعه بيده—خيرًا كان أو شرًّا. فلذلك ينبغي للإنسان أن يجتهد، رويدًا رويدًا، في ادّخار الدharma.
विदुर उवाच