उद्योगपर्व — अध्याय 33: धृतराष्ट्र-विदुर संवादः (विदुरनीतिः)
अकार्यकरणाद् भीत: कार्याणां च विवर्जनात् | अकाले मन्त्रभेदाच्च येन माद्येन्न तत् पिबेत्,न करनेयोग्य काम करनेसे, करनेयोग्य काममें प्रमाद करनेसे तथा कार्यसिद्धि होनेके पहले ही मन्त्र प्रकट हो जानेसे डरना चाहिये और जिससे नशा चढ़े, ऐसी मादक वस्तु नहीं पीनी चाहिये
ينبغي أن يُخشى الإقدام على ما لا ينبغي فعله، وأن يُخشى التفريط فيما ينبغي إنجازه، وأن يُخشى انكشاف سرّ المشورة قبل تمام الأمر؛ ولا يُشرب ما يُسكر ويُذهب العقل.
विदुर उवाच