Adhyaya 32: Saṃjaya’s Return, Audience with Dhṛtarāṣṭra, and Ethical Admonition
द्वाविमौ पुरुषव्याप्र परप्रत्ययकारिणौ । स्त्रियः कामितकामिन्यो लोक: पूजितपूजक:,दूसरी स्त्रीद्वारा चाहे गये पुरुषकी कामना करनेवाली स्त्रियाँ तथा दूसरोंके द्वारा पूजित मनुष्यका आदर करनेवाले पुरुष--ये दो प्रकारके लोग दूसरोंपर विश्वास करके चलनेवाले होते हैं
قال فيدورا: «اثنان يسيران معتمدين على تصديق غيرهم: نساءٌ يشتهين الرجل الذي تشتهيه نساءٌ أخريات، ورجالٌ يوقّرون من قد وُقِّرَ وعبده الناس.»
विदुर उवाच