Udyoga Parva 21 — Bhīṣma’s Conciliatory Counsel, Karṇa’s Rebuttal, and Dhṛtarāṣṭra Sends Sañjaya (भीष्म-कर्ण-विवादः; संजय-प्रेषणम्)
दिष्ट्या च संधिकामास्ते भ्रातर: कुरुनन्दना: । दिष्ट्या न युद्धमनस: पाण्डवा: सह बान्धवै:,“कुरुकुलको आनन्दित करनेवाले पाँचों भाई पाण्डव सन्धिकी इच्छा रखते हैं, यह सौभाग्यका विषय है। वे अपने बन्धु-बान्धवोंके साथ युद्धमें मन नहीं लगा रहे हैं, यह भी सौभाग्यकी बात है
إنه لَحُسنُ طالعٍ أن إخوة پاندافا—مباهج آل كورو—يرغبون في الصلح. وحُسنُ طالعٍ أيضًا أنهم، مع ذويهم وأقربائهم، لا تميل نفوسهم إلى الحرب.
वैशम्पायन उवाच