Pāṇḍava-senā-niryāṇa and Vyūha-vibhāga (पाण्डवसेनानिर्याण तथा व्यूहविभाग)
अस्माभ्ि: प्रीतिकामैस्तु भ्रातुर्ज्येष्ठस्य नित्यश: । मर्षितं ते दुराचार तत् त्वं न बहु मन््यसे,“दुराचारी दुर्योधन! हमलोगोंने सदा अपने बड़े भाईको प्रसन्न रखनेकी इच्छासे तेरे बहुत-से अत्याचारोंको चुपचाप सह लिया है; परंतु तू इन बातोंको अधिक महत्त्व नहीं दे रहा है
«يا دوريودَهَنَةُ سيّئَ السيرة! لقد احتملنا كثيرًا من طغيانك صامتين، رغبةً منّا في إرضاء أخينا الأكبر على الدوام؛ غير أنّك لا تُعير ذلك كبيرَ شأن.»
संजय उवाच