उद्योगपर्व अध्याय १३३ — संजये मातृउपदेशः
Udyoga Parva Adhyaya 133 — A Mother’s Counsel to Saṃjaya
निर्विण्णात्मा हतमना मुज्चैतां पापजीविकाम् । यदि तुझे जीवनके प्रति अधिक आसक्ति न हो तो तू अपने सभी शत्रुओंको परास्त कर सकता है और यदि इस प्रकार विषादग्रस्त एवं हतोत्साह होकर ऐसी कायरोंकी-सी वृत्ति अपना रहा है तो तुझे इस पापपूर्ण जीविकाको त्याग देना चाहिये
وقد استولى عليك السأمُ وانكسرَت همّتُك—فاهجرْ هذه المعيشةَ الآثمة. إن لم تكن شديدَ التعلّق بالحياة قدرتَ أن تقهرَ جميعَ أعدائك؛ أمّا إن ظللتَ غارقًا في الكآبة، خائرَ العزم، متشبّهًا بالجبناء، فعليك أن تتركَ هذا الكسبَ الملطّخَ بالإثم.
पुत्र उवाच