Vidurā–Putra Saṃvāda: Utsāha, Kīrti, and Kṣātra Resolve
Udyoga-parva 131
इतो दुःखतरं कि नु यदहं हीनबान्धवा । परपिण्डमुदीक्षे वै त्वां सूत्वामित्रनन्दन,शत्रुओंका आनन्द बढ़ानेवाले पाण्डव! इससे बढ़कर दुःखकी बात और क्या हो सकती है कि मैं तुम्हें जन्म देकर भी बन्धु-बान्धवोंसे हीन नारीकी भाँति जीविकाके लिये दूसरोंके दिये हुए अन्न-पिण्डकी आशा लगाये ऊपर देखती रहती हूँ
«أيُّ حزنٍ أشدُّ من هذا: أن أكونَ امرأةً بلا سندٍ ولا قرابة، فأعيش كالمحرومة، أرفع بصري مترقِّبةً لقمةً يمنحها الآخرون لأجل القوت؟ يا ابنَ باندو، يا من يزيدُ سرورَ الأعداء! مع أنّي ولدتك، فقد صرتُ أرجو طعامَ غيري.»
वायुदेव उवाच