उद्योगपर्व — अध्याय १२५: दुर्योधनस्य प्रत्युत्तरम्
Duryodhana’s Reply in the Kuru Assembly
यावत् कृष्णावसंनद्धौ यावत् तिष्ठति गाण्डिवम् | यावद् धौम्यो न मेधाग्नौ जुहोतीह द्विषद्बलम्,“वत्स! जबतक श्रीकृष्ण और अर्जुन कवच धारण करके युद्धके लिये उद्यत नहीं होते हैं, जबतक गाण्डीव धनुष घरमें रखा हुआ है, जबतक धौम्य मुनि यज्ञाग्निमें शत्रुओंकी सेनाके विनाशके लिये आहुति नहीं डालते हैं और जबतक लज्जाशील महाथनुर्धर युधिष्ठिर तुम्हारी सेनापर क्रोधपूर्ण दृष्टि नहीं डालते हैं, तभीतक यह भावी जनसंहार शान्त हो जाना चाहिये
vaiśampāyana uvāca |
yāvat kṛṣṇāvasaṃnaddhau yāvat tiṣṭhati gāṇḍīvam |
yāvad dhaumyo na medhāgnau juhotīha dviṣadbalam |
قال فايشَمبايانا: «يا بُنيّ، ما دام كريشنا وأرجونا لم يَتَسَلَّحا بعدُ بالدروع استعدادًا للحرب، وما دام قوس غانديفا لا يزال في البيت، وما دام الحكيم دهاوميا لم يشرع هنا في صبّ القرابين في نار القربان لهلاك جموع العدو—فإلى ذلك الحين ينبغي أن يُدرَأ هذا القتلُ الوشيك ويُرَدَّ إلى السِّلم.»
वैशम्पायन उवाच